Friday, May 21, 2010

रिश्ते.......

जिन्दगी हमें बहुत कुछ बताती है, बहुत कुछ सिखाती है। शायद जो हम नही सीखना चाहते वो भी जिन्दगी की भेड़-चाल में सीख ही जाते हैं और इन सभी उतार-चढ़ाव के बीच हम किसी को साथ पाते हैं तो वो हमारे अपने ही होते हैं, पर यहाँ भी एक समस्या मुँह बनाये खड़ी है। ये अपने है कौन, अपनों की परिभाषा क्या है? क्या अपने केवल वो हैं जिनसे हमारे खून के रिश्ते जुड़े होते है, या कहलाने को वो हमारे रिश्तेदार होते हैं, या फिर वो जिन्हें हम अपने हमसफर के तौर पर देखने लगते हैं उनके एहसास को समझने लगते हैं? पर शायद मेरी नजर में अपने और अपनेपन की परिभाषा एकदम अलग है। मुझे लगता है या कहूँ जहाँ तक मैने रिश्तों को समझा है लगा कि अपने वो होते हैं जिनसे हमारे दिल जुड़ते हैं। जिन्हें हम समझते हैं और जो हमे समझते हैं। वही तो अपने होते हैं जो हमारी भावनाओं से जुड़े होते हैं। सबसे प्यारा रिश्ता होता है माँ और बच्चे का क्या इससे भी अपना कोई रिश्ता होगा परंतु यदि हम इतिहास के पन्नों मे झाँक कर देखें तो पाते हैं कि यशोदा, कृष्ण की सगी माँ नही थीं। फिर भी क्या यहाँ किसी प्रकार से अपनेपन की भावना कम दिखती है, नही दिखती है क्योंकि रिश्ते तो भावनाओं से जुड़ते हैं।
इसी तरह हूमायूँ- पदमिनी का रिश्ता एक ऐसा रिश्ता जो सिर्फ एक धागे से बन गया। तभी तो कहा गय़ा है दिल का रिश्ता बड़ा ही प्यारा है। पर ऐसे लोगों की कमी भी नही है जो न जाने किन दुर्भावनाओं के शिकार है जिन्हें ना तो रिश्तों की समझ है और ना ही अपनेपन की वो तो हर रिश्ते को फायदे नुकसान के तराजू पर तौलते हैं और अपने गंदे विचारों के मद्देनजर हर रिश्ते की बखिया उधेड़ते है। जररुत इस बात कि है कि हम समझ पायें इन दुर्भावनाओं को और इन गंदी विचारों की तपिश से बचा पायें खुद को और बचा पायें अपने कोमल रिश्तों को …
ये सोचकर दरख्तों के नीचे छाँव होती है
हम बबूल के साये में आ के बैठ गये।
और पहचान पायें ऐसे लोगों को जिनके लिये रिश्तों के कुछ मायने ही नही हैं। ये सारी बाते मैंने भोपाल आकर सीखी हैं जो मेरे भविष्य में जरुर काम आयेगी क्योंकि इससे पहले तो जिसने मुझसे अच्छे से बात कर ली वो अच्छा हो गया। पर यहाँ आकर मैने जाना-
जब भी जी चाहे नयी दुनिया बना लेते हैं लोग

एक चेहरे पर कई चेहरे लगा लेते हैं............
तो क्या किया जाय बस उपाय यही है कि जहाँ तक हो सके इन भेड़ियों से दूर रहा जाय।
सोनम झा