Friday, March 19, 2010

स्पेशल मैरिज एक्ट

लगभग एक माह पहले विधि मंत्री एम.वीरप्पा मोइली ने स्पेशल मैरिज एक्ट में सुधार का प्रस्ताव रखा, जिसके तहत कोर्ट द्वारा मैरिज करने से पूर्व जो 30 दिन पहले नोटिस दिया जाता है अब उसकी कोई आवश्यकता नही होगी।
जाति और धर्म से बाहर अपना जीवन साथी चुनने के लिये अब युवाओं को ज्यादा सोचने विचारने की जरुरत नही होगी। ये सोचने वाली बात है कि जब आज का युवा अपने हिसाब से अपनी पढाई का चुनाव करता है अपने इच्छा अनुसार अपने फैसले लेता है तो शादी जैसे जरुरी फैसले में उन्हे इतना समस्याओं का सामना क्यो करना पड़ता है। जी हां जब आज के युवा अपनी जिंदगी से जुड़े सभी फैसलो को जब स्वयं अंजाम दे रहे हैं तो शादी करने के लिए उन्हे किसी नोटिस की क्या आवश्यता है, ऐसा हमारे विधि मंत्री का कहना है। कानून के अनुसार स्पेशल मैरिज करने वालो के आवेदन करने पर अदालत 30 दिन का नोटिस देता है। जिसका उद्देश्य बाल विवाह और जबरन शादी करने से रोकना है। लेकिन अंतरजातीय मामलो मे ये अवधि खतरनातक रुप धारण कर लेती है। नोटिस के कारण आस पास के लोगो को तथा लड़का लड़की के घरवालो को उऩका पता लग जाता है। सरकार के अनुसार ये अवधि दोनो पक्षो के लोगों को उनके खिलाफ कदम उठाने का मौका देती है। इन सब बातों को ध्यान रखते हुए, स्पेशल मैरिज एक्ट में संशोधन किया जायेगा संशोधन के लिये गृह मंत्रालय ने विधि मंत्रालय से संशोधन ले लिया है। इसके पहले जो पहल होगा-(1) स्पेशल मैरिज एक्ट
(2) विधि मंत्राललय ने दी हरी झंडी,
(3) आंनर किलिंग रोकने मे भी मदद।
इस नये कानून वय्वस्था से जहां एक ओर युवाओं मे प्रसन्नता दिखाई देगी वही ऐसे लोग जो आज भी रुढिवादिता के जंजीरो में जकड़े हुये उनके लिये यह कानून समस्या की वजह बन जायेगी दोस्तो ये बात भी ध्यान देने योग्य है कि क्या एक 18 साल की लड़की और 21साल का लड़का जो अभी पूरी तरह दुनीयादारी समझ हीं नहीं पाये हैं वो अपने जीवन से जुड़े इतने अहम फैसले का निर्धारण स्वयं कर पायेंगे।
मगर दोस्तो आप लोगों को नही लगता समाज में इससे जो बदलाव आयेगा उसके बाद जो होगा उसमें सबसे प्रमुख बात यह होगी की युवा बिना सोचे समझे जीवन से जुड़ा इतना अहम फैसला लेने लगेंगे।
परंतु इसके कुछ सकारात्मक पक्ष भी जरुर सामने आयेंगे जिसमे ऐसे युवा जो अपने पैड़ो पर खड़े हैं उन्हे बिना डरे अपने जीवन को जीने का अवसर प्राप्त होगा।