तमाम पल ठहर जाते हैं और हम
आगे बढ़ जाते हैं
फिर खुद
को यादों के झुरमुटों मे. पाते हैं
उन पलों
में वापस नहीं जा सकते पर
उन पलों
में जिया जा सकता है
तब जब हम बिखर रहे होते हैं
तूफानों में बह रहे होते हैं
कुछ पल ऐसे होते हैं जो हमारे जेहन में बस जाते हैं
और इन पलो में जो हमारे साथ होता है वो और कोई नहीं
वही साथ दोस्त कहलाता है
जिस रिश्ते की जड़ हमारे वजूद को बॉधे रखती है
और जिसका एहसास हमे सम्भाले रखता है
दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जो कभी खत्म नहीं होता
कोई आगे बढ़ जाता है कोई पीछे छुट जाता है
कोई उत्तर में होता है और कोई खुद को सुदुर दक्षिण में पाता है
पर दोस्ती में बिताये गये पल सुनहरे होते हैं
जिन्हें वक्त चंदन की डिबिया में सहेज कर रख देता है
जिसे हम जब चाहे खोलकर उसकी महक से सराबोर हो जाएं
क्योंकि पल खत्म नहीं होते ठहर जाते हैं
वैसे हीं जैसे दुख खत्म नहीं होता कम हो जाता है....