इंसान सिर्फ
ऑक्सीजन से नही जीता जीने के लिए सपनों की एक लम्बी लिस्ट की भी जरुरत होती है, क्योकिं बहुत खतरनाक
होता है हमारे सपनों का मर जाना. सपने अपने सबसे सगे होते हैं तभी तो जब सपने सच हो
जाते हैं तो हम झूम उठते है और जब टूट जातें हैं तो ऐसा लगता है जैसे हमारा वजूद हीं
बिखर गया ऐसे में हमारे सपनों की तादात हीं हमें सम्भाल लेती है, सपनों की तादात इतनी
हो कि यदि इसका एक बड़ा हिस्सा यदि किसी कारण हमसे छिन जाए तो भी हमारी झोली खाली ना
हो और क्योकि हमारा मन तो सपनों के ऑक्सीजन
से हीं जीवित रहता है..सपने देखे ऑखों से जाते हैं महसूस मन से किए जाते है पर इनको
तरोताजा रखने के लिए जरूरी है सपनों के पौधे आत्मविशवास से भरे जमीन पर लगाए जाएं और
इनको बराबर मेहनत और लगन से सींचा जाए, फिर देखिए शाब सपनों के पौधों में जो सफलता के फूल
लगेंगे वो आपको जो सुख देंगे उकका क्या कहन.
Sunday, November 3, 2013
Friday, November 1, 2013
इंसान सोच तो ले उसका इरादा क्या है..
जिन्दगी के तमाम अनुभव बस यही कहते हैं जिन्दगी सिर्फ जिने के लिए नहीं
होती जिन्दगी मे जितना भी जरुरी है, ये जीत हार हमेशा हमें घेरे रहते हैं और हम ज्यादातर
जानबूझकर हारते हैं और बड़ी शिद्द्त से जीत हमारे हिस्से मे आती है. सामाजि – आर्थिक
कारणों के अतिरिक्त हमारी खुद से खुद की एक जद्दोज़हद होती है जो होना बहुत जरुरी है, और जिसे बामुश्किल हीं
कोई सही – सही जान पाता है कि आखिर हम खुद से क्या चाहते हैं हमारी खुद से खुद की क्या
उम्मीदें हैं. इंसान एक बार ये जान पाए कि उसका इरादा क्या है, फिर समझ लिजिए शाब आपने
जिन्दगी की आधी से ज्यादा लड़ाई जीत ली रास्ते तैयार हो गए है अब तो बस पैरो की ताकत
बरकरार रखने की जरुरत है.
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