Friday, August 27, 2010

ये बजाय क्यों आ जाता है.?.

छोड़ आये हम वो गलियां ये गाने के बोल नही जीवन की सच्चाई है। हम अपने भविष्य की चाह मे वर्तमान को छोड़ आते है, और छूट जाता है इसके साथ हीं अपनो का साथ हम दूर हो जाते हैं अपने परिवार से भाई-बहनों से अपने आँगन से,छत से और अपनी गलियों से इन सब के बावजूद ये हमारे साथ ही रहते हैं हमारे दिल में पर उससे क्या हुआ कि हम दूर रहते हैं पर इनका एहसास हमेशा हमारे साथ रहता है । फिर भी क्या साथ क्यों नही रहते ये सब जीवन भर क्यों कुछ दिन साथ रहने के बाद ये यादों के गलियारों मे कहीं सिमट से जाते हैं और रह-रह कर तड़पाते हैं क्या यही है जीवन अपनों से दूर होना।वो दोस्तो के साथ दौड़ने के बजाय बस के साथ दौड़ना, मम्मी से नाराज होने के बजाय किसी की नारीजगी का सामना करना होता सबकुछ है पर बस इन सभी में बजाय लग जाता है पर क्यों लग जाता है बजाय ये समझ नही आता। और बार- बार यही होता है जिनको पकड़ा हाथ समझकर वो केवल दस्तानें निकले ।

1 comment:

  1. बतवा त ठीके कह रहे हैं लेकिन का करिएगा,कुछ पाना है तो कुछ तो खोना ही पड़ेगा न..........

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