स्नेह की बरसात अपनो का प्यार ये सब बाते हीं सिर्फ अभी मेरे जे़हन मे घूम रही हैं क्योकिं अभी बस एक हीं दिन तो हुआ तो है मुझे अपनों से दूर आये हुये। बातों बातों मे न जाने कब गुजर गये 25 दिन मुझे पता भी नही चला। हर बार की तरह इस सेमेस्टर में भी यही फेसला हुआ था कि ज्यादा दिन नहीं रहना है घर पर क्योकि घर पर पढाई नहीं हो पाती है। फिर भी कुछ किताबे तो साथ गयी हीं थी जिनको खोलकर देखने की भी जहमत नही उठाई गयी। ये कहानी सिर्फ मेरी हीं नही ज्यादातर हमारे सारे दोस्तों की यही कहानी है। जो यही सोचकर घर गये थे कि परिक्षायें करीब है इस बार तो कुछ पढाई करेंगे हीं
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