Saturday, April 16, 2011
भोपाल से जुड़े अनुभव
बहुत दिनों से मन में इच्छा थी कि भोपाल शहर को जान पाऊं क्योंकि हमलोग जिस ईलाके में रहते हैं यहाँ पर भोपाल शहर अपनी संस्कृति से दूर आधुनिकता की गोद में समया हुआ है। ये जगह ए.पी.नगर के नाम से जाना जाता है। यहाँ आने से पूर्व जो भोपाल के बारे में मेरी जो परिकल्पनायें थीं वो लगभग उत्तर प्रदेश के लखनऊ शहर जैसी हीं थी कि यहाँ भी महौल नवाबी अंदाज जैसा ही होगा, परंतु यहाँ पढ़ाई और सेमिनार के बीच कभी ऐसा अवसर ही नहीं मिला की भोपाल के वास्तविक स्वरुप को जान पाऊं यहाँ कि गलियों को पहचान पाऊं। इसी बीच जब मैनें अपने थर्ड सेमेस्टर की परीक्षा खत्म की यानि की भोपाल में अब बस गिने चुने महिनें हीं मेरे लिये बच गये इसी बीच समर्थन नामक शहर के प्रतिष्ठित एन.जी.ओ के कार्यकर्ता चंचल मोदी के द्वारा हमें एक ऐसा अवसर प्राप्त हुआ जिससे हम इस शहर के विभिन्न वार्डो में घूम सकें और भोपाल की मौलिकता को पहचान सकें। हम सारे दोस्त लगभग एक हीं थाली के चट्टे-बट्टे हैं और क्या चाहिये था हमें हम झट तैयार हो गये। चंचल सर ने हमें बताया की 23 फरवरी को हमारा ओरिएन्टेशन होगा जिससे हमें इस सर्वे कार्यक्रम के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी, दरअसल इस सर्वे कार्यक्रम का आयोजन स्वीडन की उप्पसल्ला विश्वविधालय की ओर से किया गया था जिसको भोपाल में सुचारु रुप से संचालित करने के जिम्मेदारी समर्थन के उपर थी। 25 फरवरी 2011 से शुरु हुआ ये सर्वे जिसका लक्ष्य था यहाँ रहने वाले लोगों के सहिष्णुता को परखना । ये सर्वे हमारे लिये बड़े हीं रोचक अनुभवो वाला रहा। मेरा पहला दिन श्री राम काँलोनी में बीता ये एक ऐसी काँलोनी है जहाँ शहर के उच्च-मध्यमवर्गीय लोगों का हीं बसेरा नजर आया और कुछ ज्यादा वालों का ठौर। यहाँ हमने पाया महानगरों की तरह एक घर में रहने वाले लोगों को ये भी नही की पता था कि उनके एकदम पड़ोस में कौन रहता है? सफाई के मामले मे चकाचक यह ईलाका अपने आप में ही मशगूल नजर आया। यहाँ रहने वाले लोगों से हमें यह मालूम हुआ की वे भारतीय अखण्डता में विश्वास करते हैं उनके लिये इंसानियत सर्वोपरी है। पर एकाध लोग ऐसे भी मिले जिनका कहना था कि मुस्लिमों को तो देश से निकाल हीं देना चाहिये या फिर उनके अधिकारों को एकदम संकुचित कर देना चाहिये क्योंकि साहब सारी फसाद की जड़ यही हैं। दूसरे दिन एक ऐसे मोहल्ले में बिता जो दो भागों में विभाजित था एक पूरे भाग में मुस्लिमों का डेरा-बसेरा और दूसरे भाग में हिन्दुओं का परंतु यहाँ रहने वाले ज्यादातर हिन्दू पिछड़े वर्ग और हरिजन समूह के थे। यहाँ रहने वाली मुस्लिम औरतों का कहना था कि हिन्दुओं से हमें कोई बैर शिकायत नही वो तो हमारे हीं भाई है, परंतु हिन्दू लड़कियों की सौबत में हमारी बेटियां भी ज्यादा आधुनिक हुये जा रही हैं जिससे ज्यादा परदा करने को कहने पर हमारी लड़किया हमें हिन्दू लड़कियों के उदाहरण देने लगती हैं। परंतु यहाँ रहने वाली झुग्गियों की औरते कई मौके पर अच्छे पक्के मकान में रहने वाली औरतों से ज्यादा सशक्त और जानकार नजर आयीं। इसके बाद हमारा सफर बाल्मीकि नगर और कुम्हारपुरा में रहा यह ईलाका महाराणी लक्ष्मीबाई वार्ड में आता है यहाँ भी बाल्मीकि नगर एक झुग्गियों वाला ईलाका है जहाँ ज्यादातर लोग हरिजन है और कुछ परिवार पिछड़े वर्ग के है। परंतु यहां की झुग्गियों में रहने वाले लोग बड़े हीं व्यवहार कुशल और सामाजिक तौर पर जानकार नजर आये। यहाँ के एक घर की महिला किरण लोट ने तो मेरे मन में एक खास जगह बना लिया। महज आठवीं पास यह महिला अपने व्यवहार और कुशल वाणी के माध्यम से अच्छे-अच्छो को मात देने में समर्थ नजर आयीं। परंतु यहाँ रहने वाले कुछ घरो में मुस्लिमों को लेकर एक अलगाव सा नजर आया खासकर महिलाओं के अंदर ये भाव ज्यादा दिखे जिसका कारण उन्होनें बताया कि उनको मुस्लिमों का रहन-सहन बिल्कुल नही पसंद। मुस्लिम रोज नहाते नही और बड़े गंदे तरिके से रहते हैं ऐसी आदत हमारे बच्चे हमारे बच्चे सिखेंगे तो वो भी गंदे हो जायेंगे इसके बाद बारी आयी निशातपुरा के कृष्णा काँलोनी की इस काँलोनी का नाम जानने के बाद हमे लगा कि ये कोई हिन्दू बाहुल्य ईलाका होगा पर यहाँ जाने के बाद हमे पता चला यह एक मुस्लिम बाहुल्य ईलाका है जहां केवल दो घर ही हिन्दुओं के मिले। इस ईलाके में हमने पाया लोगों का बर्ताव सामान्य नजर नही आया और बहुत कोशिशों के बावजूद वो हमारे साथ अनमने भाव से पेश आये। ये अनुभव अब तक का सबसे अलग अनुभव रहा। परंतु इसके बाद एक ऐसा ईलाका हमारे हिस्से में आया जो भोपाल के उन यादों को ताजा करता है जिसने लगभग भोपाल का विनाश ही कर डाला था यानि भोपाल गैस त्रासदी से क्षतिग्रस्त हुआ ईलाका आयूब नगर यह एक झुग्गी के रुप मे जाना जाता है। चूकि यहाँ पर रहने वाले लोंगो के पास कोई स्थाई रोजगार नही है तो उनका ज्यादा समय बैठक बाजी में ही बीता करता है। यह ईलाका हिन्दू-मुस्लिम मिश्रित आबादी वाला ईलाका है। यहाँ भी द्वन्द साफ सफाई का ज्यादा नजर आया यहाँ भी ज्यादातर लोगों ने सामाजिक और राष्ट्रीय एकता पर बल दिया परंतु कुछ लोगों ने मुस्लिमों से होने वाली समस्याएं जैसे उनके रहन-सहन के तरिके उनके धार्मिक कट्टरता पर व्यंगात्मक रवैया अपनाया। इस सर्वे के दौरान हमने पाया ज्यादातर लोग भारत की राजनीतिक व्यवस्था से तो संतुष्ट है पर अपने राजनेताओं से उनको ढेरो शिकायतें हैं। कुछ तो इसका मतलब हीं नही समझते सरकार मतलब उनके पसंद के उस आदमी की होनी चाहिये जिस पार्टी को उनके परिवार वाले बरसों से वोट देते आ रहे है। इससे कुछ सरोकार नही की वो आदमी वोट के काबिल है भी या ऩही। इस सारे सर्वे के दौरान मैनें समपन्नता और विपन्नता की ऐसी खाई देखी जिसको पाटना बड़ा जटिल नजर आया। एक ऐसा वर्ग जिसके पास खाली समय में सोचने के अलावा और कुछ काम नही है,और एक ऐसा वर्ग जिसके पास काम के अलावा और कुछ के लिये समय हीं नही बच पाता फिर भी दो समय के खाने का पूरा जुगार नही हो पाता। इस सब के अलावा मैं जहाँ भी गयी पुरुष वर्ग ज्यादा जागरुप नजर आया महज एकाध स्त्रियों को छोड़कर मैनें पाया जीवन के 40-50 से भी ज्यादा साल बिता देने के बाद भी ज्यादातर स्त्रियां एक छोटा सा फैसला लेने कि लिये भी घर के पुरुषों पर निर्भर रहती हैं। वहीं मैनें पाया चमकता हुआ भोपाल सभी के आँखो को रोशन करता है वहीं इस भोपाल के इन निम्न ईलाकों में रहने वाले लोग पानी की कमी,गंदगी और असुरक्षा के बीच जीवन यापन करने को मजबूर हैं क्योंकि इसके अलावा इनके पास और कोई चारा नहीं है। सरकार के द्बारा चलाये गये सुधार कार्यक्रम कागज पर तो बड़ी तेज गति से चल रहे है परंतु शायद इन गलियों के अंधेरेपन के कारण ये यहाँ सुचारु तौर पर लागू नही हो पा रहें हैं।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
लेख में शब्दों का इस्तेमाल बखूबी किया गया है. लेखिका इसके लिए बधाई की पात्र है. भोपाल का बड़ा सजीव चित्रण किया गया है. पढने के बाद लगा की भोपाल की गलियों से ही गुजर रहा हूँ. लोगों की मानसिकता को भी भली-भांति लेखिका ने उकेरा है. लिखते रहिये. आपमें एक वरिस्थ पत्रकार और लेखिका बनने के गुण हैं.
ReplyDeletebadhai ho...jai mata ki
ReplyDeleteyaar tm to kamal ho mst likhi ho yaar
ReplyDeleteSonam jee, aapke iss lekhankan se mai kafi khoosh hu, aur aapme ek Journalist hone k saari khoobiya vidyamaan hai.......,
ReplyDeleteGod Bless you,
good post
ReplyDelete