Friday, February 10, 2017

कसमसाहट

एक पल को कभी ऐसा ख्याल हीं नही आता की जिन्दगी एक दम आसन होगी आगे की सोचो तो लगता है पल पल निकल रहा है ..तेजी से बहुत तेजी से सब कुछ दिनों दिन जटिल से जटिल हो रहा है ..शिक्षा , रोजगार , आहार , पानी सब कुछ बिकने लगा ..सहजता से दूर हम सब एक जाल में फंसते जा रहे हैं ..सहूलियत की एक एक आदत इस जाल को और मजबूत करती जा रही है ..हम अपने आप को दिन ब दिन मशीन बनाते जा रहे हैं ..इन सुविधाओ की एवज में हम अपनों से दूर होते जा रहे हैं ..अपनों की जगह मशीनों ने ले लिया है ..सब कुछ है बस मन का चैन नही ..असुर्खा की भावना बढती हीं जा रही है ...डर की सतह पर हम फिसलते जा रहे हैं ..और हम छटपटा रहे हैं ..अपनी जगह पर और हमारे पैर फसे हुए हैं ...हम नही निकल सकते इन सब से ..

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